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Singrauli News: Deplorable Conditions at Devsar CHC—AC Units Worth Lakhs Reduced to Showpieces, CCTV Cameras Non-functional, Patients Suffering in Scorching Heat.
स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे गंभीर सवाल, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था भी चरमराई
Singrauli News: सिंगरौली। जिले के देवसर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार होती नजर आ रही हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां अस्पतालों में मरीजों को राहत और बेहतर उपचार की उम्मीद रहती है, वहीं देवसर CHC में मरीज उमस, घुटन और बदहाल सुविधाओं के बीच इलाज कराने को मजबूर हैं। अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए एयर कंडीशनर (AC) लंबे समय से बंद पड़े हैं और अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। इसके साथ ही अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे चल रही है, क्योंकि परिसर में लगे अधिकांश CCTV कैमरे भी बंद बताए जा रहे हैं।
गर्मी से बेहाल मरीज, वार्डों में नहीं राहत
मई की भीषण गर्मी में तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे हालात में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को राहत मिलना तो दूर, उन्हें अस्पताल के भीतर ही उमस और घुटन झेलनी पड़ रही है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि वार्डों में लगे अधिकांश AC या तो खराब पड़े हैं या लंबे समय से बंद हैं। गर्मी के कारण मरीजों की हालत और बिगड़ रही है। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों के परिजन हाथ के पंखों और गत्तों से हवा करते नजर आते हैं। अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासन द्वारा अस्पतालों में मरीजों की सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण सुविधाएं जमीन पर दम तोड़ देती हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि समय पर AC का रखरखाव कराया जाता, तो मरीजों को इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल
देवसर CHC में केवल स्वास्थ्य सुविधाएं ही नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई हुई दिखाई दे रही है। अस्पताल परिसर में सुरक्षा के लिए लगाए गए CCTV कैमरे लंबे समय से बंद पड़े बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक तकनीकी खराबी के कारण कैमरे काम नहीं कर रहे, लेकिन उनकी मरम्मत को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। ऐसे में अस्पताल परिसर की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर CCTV कैमरों का बंद होना गंभीर चिंता का विषय है। इससे मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहता है। कई बार अस्पतालों में चोरी, विवाद और असामाजिक गतिविधियों की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन निगरानी व्यवस्था ठप होने के कारण जिम्मेदारों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती।
स्वच्छता अभियान की खुल रही पोल
अस्पताल परिसर में गंदगी और अव्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। परिसर के कई हिस्सों में कचरे का जमावड़ा देखा जा सकता है। साफ-सफाई की स्थिति ऐसी है कि अस्पताल आने वाले मरीज और उनके परिजन खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। एक ओर शासन स्वच्छता अभियान को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। लोगों का कहना है कि यदि ब्लॉक स्तर के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति है, तो दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के उप स्वास्थ्य केंद्रों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्षेत्रवासियों में बढ़ रहा आक्रोश
देवसर क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव सीधे मरीजों के जीवन से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लोगों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और बंद पड़े AC व CCTV कैमरों को जल्द चालू कराया जाए। साथ ही अस्पताल परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है।
जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने लंबे समय से अस्पताल की व्यवस्थाएं खराब होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं? क्या अस्पताल प्रबंधन को मरीजों की परेशानियां दिखाई नहीं दे रहीं या फिर शिकायतों के बावजूद जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? देवसर CHC क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। ऐसे में यहां की बदहाल व्यवस्था केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़ा करती है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और मरीजों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।