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Singrauli News: बारिश ने खोली ननि के विकास की पोल: टूटी पुलिया, धंसी सड़कें और घरों में घुसता पानी

Rama Posted on: 2026-08-19 11:24:00 Viewer: 48 Comments: 0 Country: India City: Singrauli

Singrauli News: बारिश ने खोली ननि के विकास की पोल: टूटी पुलिया, धंसी सड़कें और घरों में घुसता पानी Singrauli News: Rain exposes the reality of municipal development—broken culverts, sunken roads, and water entering homes.

अरबों के बजट के बावजूद बुनियादी सुविधाएं बदहाल, निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर उठे गंभीर सवाल

Singrauli News: सिंगरौली। मूसलाधार बारिश ने सिंगरौली में विकास के उन दावों की हकीकत सामने ला दी है, जिन्हें कागजों और प्रचार में चमकदार तस्वीरों के साथ पेश किया जाता रहा है। कुछ माह पहले बनी सड़कें जगह-जगह धंस गईं, चार-पांच पुलियाएं क्षतिग्रस्त हो गईं, नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था की पोल खुल गई और सीवर लाइन के अधूरे काम के कारण कई इलाकों में बारिश का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया। सवाल सिर्फ बारिश से हुए नुकसान का नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि आखिर करोड़ों-अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी सिंगरौली की बुनियादी अधोसंरचना पहली ही बड़ी बारिश में क्यों जवाब दे रही है?

क्या निर्माण से पहले गुणवत्ता सिर्फ कागज पर जांची जाती है?
बारिश में सड़क और पुलिया टूटना अपने आप में असामान्य नहीं माना जा सकता, लेकिन यदि नवनिर्मित सड़कें और पुलियाएं कुछ ही महीनों में जवाब देने लगें, तो निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री, तकनीकी मानकों और निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जिम्मेदार इंजीनियरों ने गुणवत्ता की जांच किस आधार पर की? क्या निर्माण एजेंसी को भुगतान करने से पहले स्थल का तकनीकी परीक्षण किया गया? यदि किया गया था तो पहली बारिश में इसकी पोल कैसे खुल गई? यही वे सवाल हैं जिनका जवाब जनता चाहती है।

सड़क बनी या गड्ढों का भविष्य तैयार किया गया?
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह सड़कों की हालत ऐसी है कि बारिश का पानी भरते ही सड़क और गड्ढे में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। वाहन फंस रहे हैं, दोपहिया चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं और पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर सीवर और पाइपलाइन के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत भी सवालों के घेरे में है। यदि सड़क निर्माण के बाद उसे दोबारा उसी मजबूती से बहाल नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की सड़क आखिर किस काम की?

नालियां सफाई मांगती रहीं, पानी घरों में पहुंच गया
शहर की जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। बारिश शुरू होते ही नालियां उफनने लगती हैं और कई मोहल्लों में गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है। सवाल यह है कि बारिश से पहले नालियों की सफाई, जलनिकासी मार्गों की जांच और संवेदनशील स्थानों की पहचान क्यों नहीं की गई? हर साल बारिश के बाद राहत और मरम्मत के नाम पर पैसा खर्च करने के बजाय बारिश से पहले स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जाती?

ठेकेदार अकेला जिम्मेदार कैसे?
घटिया निर्माण सामने आने पर कार्रवाई अक्सर ठेकेदार तक सीमित रह जाती है। लेकिन किसी भी सरकारी निर्माण में ठेकेदार के साथ-साथ तकनीकी अधिकारी, इंजीनियर, निरीक्षण करने वाले कर्मचारी और भुगतान स्वीकृत करने वाली व्यवस्था की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि काम खराब था तो उसका निरीक्षण किसने किया? यदि गुणवत्ता में कमी थी तो भुगतान किस आधार पर हुआ? और यदि सब कुछ नियमों के मुताबिक था, तो कुछ महीनों में निर्माण ध्वस्त क्यों हो गया? इन सवालों का जवाब सिर्फ ठेकेदार से नहीं, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था से मांगा जाना चाहिए।

‘सिंगापुर’ के सपने के बीच बुनियादी सुविधाओं का संकट
सिंगरौली को आधुनिक और विकसित शहर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। जिले में DMF, CSR और औद्योगिक गतिविधियों से मिलने वाले संसाधनों के बावजूद यदि जनता को हर बारिश में जलभराव, टूटी सड़क, क्षतिग्रस्त पुलिया और जर्जर नालियों से जूझना पड़े, तो विकास की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना लाजिमी है। सोशल मीडिया पर विकास की तस्वीरें जरूर दिखाई जा सकती हैं, लेकिन बारिश के पानी में डूबी सड़कें उन तस्वीरों की असली परीक्षा हैं।

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