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West Bengal News: From Struggle to the Pinnacle of Power: Suvendu Adhikari Becomes West Bengal's First BJP Chief Minister
West bangal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सत्ता संभाली और Suvendu Adhikari ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल R. N. Ravi ने सुवेंदु अधिकारी सहित छह मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुवेंदु अधिकारी के साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक ने भी मंत्री पद की शपथ ली। भाजपा की इस जीत के साथ ही पश्चिम बंगाल में पहली बार किसी दक्षिणपंथी दल की सरकार बनी है।
तीन दशक लंबा राजनीतिक सफर
सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक जीवन संघर्ष, संगठन और जमीनी राजनीति का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने वर्ष 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। लगातार तीन बार पार्षद चुने जाने के बाद वे कांथी नगरपालिका के चेयरमैन भी बने। करीब तीन दशक के राजनीतिक अनुभव में वे दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और पांच वर्षों तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से भी उन्हें एक मजबूत नेता माना जाता है। उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली और कई विकास परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।
विकास और सहकारिता से जुड़ी मजबूत पहचान
सुवेंदु अधिकारी केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहे। वे Hooghly River Bridge Commissioners के चेयरमैन भी रहे और औद्योगिक शहर हल्दिया के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने का प्रयास किया। सहकारिता क्षेत्र में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है। वे एग्रीकल्चर रूरल बैंक, कांथी अर्बन कोऑपरेटिव और विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक जैसे संस्थानों के चेयरमैन रह चुके हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा पारिवारिक इतिहास
सुवेंदु अधिकारी का परिवार स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। अधिकारी परिवार के बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों के करीबी सहयोगी माने जाते थे। ब्रिटिश शासन के दौरान उनके परिवार को कई बार प्रताड़ना झेलनी पड़ी। यहां तक कि अधिकारी परिवार का घर दो बार जला दिया गया था और बिपिन अधिकारी को जेल भी भेजा गया था। 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में जन्मे सुवेंदु अधिकारी ने Rabindra Bharati University से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की। वे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री Sisir Adhikari के पुत्र हैं।
नंदीग्राम आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान
सुवेंदु अधिकारी को सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान वर्ष 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से मिली। यह आंदोलन पश्चिम बंगाल की राजनीति का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और 34 वर्षों से सत्ता में काबिज वाम मोर्चा सरकार की नींव हिल गई। वे लंबे समय तक ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रहे और 2020 तक राज्य सरकार में मंत्री भी थे। लेकिन दिसंबर 2020 में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया।
“जायंट किलर” की छवि
सुवेंदु अधिकारी को बंगाल की राजनीति में “जायंट किलर” के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने वर्ष 2021 में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक पहचान बनाई। इसके बाद 2026 में भवानीपुर सीट पर भी ममता बनर्जी को मात देकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर ली। आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ ही सुवेंदु अधिकारी ने न केवल अपने राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मुकाम हासिल किया है, बल्कि बंगाल की राजनीति में भाजपा के नए अध्याय की भी शुरुआत कर दी है।