Ujjain News: धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर उज्जैन में विरोध, संतों ने की ईशनिंदा कानून बनाने की मा
Bihar News: बिहार में दर्दनाक हादसा: मिट्टी का टीला धंसने से तीन मासूम बच्चियों की मौत
IND vs NZ 1st ODI: पहले वनडे में भारत की धमाकेदार जीत, न्यूजीलैंड को पांच विकेट से हराया
Mahadev Satta App Case: महादेव सट्टा एप केस: सौरभ चंद्राकर आठ दिन की सीबीआई रिमांड पर
Singrauli News: विंध्य स्कूल सरई में मानव श्रृंखला से बनाई दीपक और स्वास्तिक की आकर्षक आकृतियां
Singrauli News: एनसीएल जयंत के आवासीय परिसर में कथित अवैध निर्माण का मामला, B-174 में पहुंचाई गईं ईं
Singrauli News: युवा संसद प्रतियोगिता में प्रगति पांडेय ने हासिल किया प्रथम स्थान
Singrauli News: महुली पाठ विद्यालय में अतिथि शिक्षक भर्ती पर उठे सवाल, सनातन रक्षा मंच ने डीईओ को सौ
Singrauli News: पार्षद अनिल वैश्य ने निगम अध्यक्ष देवेश पाण्डेय पर
Singrauli News: एनटीपीसी विंध्याचल में विक्रेता विकास कार्यक्रम आयोजित, पारदर्शिता और नैतिक व्यावसाय
Ujjain News: Protest in Ujjain over Dhirendra Shastri’s remarks; saints demand enactment of a blasphemy law.
महाकाल मंदिर के पुजारी, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और साध्वी हर्षानंद गिरि ने जताई नाराजगी
Ujjain News: उज्जैन। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर धार्मिक नगरी उज्जैन में विरोध शुरू हो गया है। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरि और साध्वी हर्षानंद गिरि ने उनके बयान पर नाराजगी जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संतों का कहना है कि व्यासपीठ पर बैठकर भगवान के स्वरूप और लीलाओं को लेकर अमर्यादित टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने देश में ईशनिंदा के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग भी उठाई है।
पं. महेश शर्मा बोले- भगवान पर टिप्पणी का अधिकार किसी को नहीं
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि धन, राजनीतिक संपर्क और लगातार बढ़ते अनुयायियों के कारण उनमें अहंकार आ गया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण लीलाधर हैं और उनके स्वरूप पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी को नहीं है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों भगवान विष्णु के अवतार हैं, इसलिए उनमें भेद करना उचित नहीं है।
पं. शर्मा ने कहा कि भगवान और सनातन धर्म का मजाक उड़ाने वालों की कथाओं का बहिष्कार किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि देश में ईशनिंदा के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए, ताकि धार्मिक आस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वालों पर कार्रवाई हो सके। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री की ओर से श्रीकृष्ण के स्वरूप और उनकी मुरली को लेकर की गई टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई।
शैलेशानंद गिरि बोले- बार-बार टिप्पणी कर माफी मांगना उचित नहीं
जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरि ने कहा कि धार्मिक और राजनीतिक मंचों पर भाषा की मर्यादा लगातार कमजोर होती जा रही है। शब्दों का चयन व्यक्ति के विचार और चरित्र को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण एक ही हैं, जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है। ऐसे में कथावाचकों द्वारा भगवान के स्वरूपों की तुलना करना उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री पहले भी इस तरह की टिप्पणियां कर चुके हैं और बाद में माफी मांगते रहे हैं। बार-बार ऐसी टिप्पणी करना और फिर माफी मांग लेना उचित नहीं है। महामंडलेश्वर ने राजनीतिक दलों और नेताओं को भी नसीहत देते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए कथित चमत्कार और पर्ची के माध्यम से पहचान बनाने वाले बाबाओं को मंच देना उचित नहीं है। नेताओं को भी इसके परिणामों के प्रति सजग रहना चाहिए।
साध्वी हर्षानंद गिरि बोलीं- मीडिया में बने रहने की कोशिश
साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण और महादेव के स्वरूप में कोई भिन्नता नहीं है। समय और परिस्थितियों के अनुसार भगवान ने अलग-अलग रूप धारण किए हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य व्यक्ति को यह समझाना अलग बात है, लेकिन व्यासपीठ पर विराजमान पीठाधीश्वर से इस तरह की टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जाती।
साध्वी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके स्वरूप को लेकर इस तरह की तुलना करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री पर मीडिया में बने रहने के लिए ऐसे बयान देने का आरोप लगाया। साध्वी ने उन्हें अपनी वाणी और शब्दों की मर्यादा बनाए रखने की नसीहत देते हुए कहा कि ऐसे वक्तव्य धार्मिक मंचों की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं।
धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी को लेकर उज्जैन के संतों की इन प्रतिक्रियाओं के बाद धार्मिक जगत में बयानबाजी तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में धीरेंद्र शास्त्री का पक्ष सामने आना बाकी है।