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हर्रहवा नदी में आंदोलन की चेतावनी, सासन पावर कंपनी के खिलाफ बढ़ रहा आक्रोश
Singrauli News: सिंगरौली। राखड़ बांध की सुरक्षा और फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलने से ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन का रूप लेने लगा है। विस्थापित परिवार संघ के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पांच दिन में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर हर्रहवा नदी में जल-सत्याग्रह करने का ऐलान किया है। ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ बांध की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है और अब आश्वासन के बजाय ठोस कार्रवाई चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार 14 अगस्त को सासन पावर लिमिटेड कंपनी का राखड़ बांध टूटने से आसपास के खेतों में राखड़ और मलबा पहुंच गया था। इसके बाद दो बार फिर राखड़ का मलबा खेतों तक पहुंचने और सीपेज की स्थिति सामने आने से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।
राखड़ से बर्बाद हुई फसल, मुआवजे का इंतजार
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण धान की फसल को भारी नुकसान हुआ और खेतों में राखड़ की मोटी परत जम गई। इसके बावजूद प्रभावित किसानों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।
बांध की सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा डर
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता राखड़ बांध की सुरक्षा को लेकर है। उनका कहना है कि लगातार बारिश के बीच यदि बांध की स्थिति कमजोर है तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से बांध की तत्काल तकनीकी जांच कराने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने वर्ष 2020 में अप्रैल के प्रथम सप्ताह में राखड़ बांध टूटने की घटना का भी हवाला दिया। उनके अनुसार उस हादसे में आठ लोगों और बड़ी संख्या में मवेशियों की जान गई थी तथा सैकड़ों एकड़ फसल राखड़ और मलबे में दब गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि पिछली घटना से सबक लेते हुए वर्तमान में सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
पांच दिन में कार्रवाई नहीं तो जल-सत्याग्रह
जिला प्रशासन से चर्चा के बाद ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन मिला है, लेकिन विस्थापित परिवार संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि पांच दिन के भीतर सुरक्षा जांच, फसल नुकसान का सर्वे और मुआवजे को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो हर्रहवा नदी में जल-सत्याग्रह किया जाएगा।