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प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को करेंगे संबोधित
Nepal News: काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह इस महीने के अंत में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में हिस्सा लेने अमेरिका जाएंगे। 24 सितंबर को प्रस्तावित उनके संबोधन में नेपाल के जलवायु संकट और हालिया विनाशकारी बाढ़ से हुए नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। नेपाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ‘क्लाइमेट जस्टिस’ यानी जलवायु न्याय का मुद्दा रखते हुए आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए वित्तीय सहायता की मांग कर सकता है।
26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ की वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से जुड़ी बताई जा रही है। राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी हैं तथा मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी 4 सितंबर तक व्यापक जान-माल और बुनियादी ढांचे के नुकसान की पुष्टि की है।
पहली विदेश यात्रा होगी
प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने वाला यह शाह का पहला बड़ा विदेश दौरा होगा। नेपाली प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई भी वह स्वयं करेंगे। संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के अनुसार शाह 24 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे।
नुकसान का आकलन तैयार कर रही सरकार
नेपाल सरकार आपदा से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है। प्रधानमंत्री के संभावित यूएन संबोधन के लिए जलवायु परिवर्तन, हिमालयी क्षेत्र की बढ़ती संवेदनशीलता और आपदा से हुए नुकसान से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जा रहा है। नेपाल पहले भी जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों के लिए हानि एवं क्षति (Loss and Damage) के मुद्दे पर विकसित देशों से अधिक वित्तीय सहयोग की मांग करता रहा है। हालिया बाढ़ के बाद यह मांग और जोर पकड़ती दिख रही है।
‘मुआवजा’ मांग पर नजर
नेपाल की ओर से जलवायु आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की मांग किए जाने की संभावना है। हालांकि, इसे औपचारिक रूप से किस रूप में और किन देशों या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के समक्ष रखा जाएगा, यह नेपाल सरकार की अंतिम रणनीति और यूएनजीए में उसके रुख से स्पष्ट होगा। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी बाढ़ के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग और राहत प्रयासों के समन्वय पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि खोज, बचाव और राहत फिलहाल उसकी प्राथमिकता है।