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Singrauli News: ₹1.13 लाख सब्सिडी का मामला जनसुनवाई में, कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश

Rama Posted on: 2026-09-16 11:37:00 Viewer: 41 Comments: 0 Country: India City: Singrauli

Singrauli News: ₹1.13 लाख सब्सिडी का मामला जनसुनवाई में, कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश Singrauli News: Case regarding ?1.13 lakh subsidy raised at public hearing; Collector orders an inquiry.

मुख्यमंत्री के मंच से मिला था ₹3.40 लाख ऋण का स्वीकृति पत्र, बैंक रिकॉर्ड और शिकायतों के निस्तारण को लेकर हितग्राही ने उठाए सवाल

Singrauli News: सिंगरौली। जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार को हुई जनसुनवाई में डेयरी इकाई के लिए स्वीकृत ऋण और शासकीय सब्सिडी से जुड़ा मामला सामने आया। ग्राम झखरावल निवासी हितग्राही ने वर्ष 2017 से अब तक के दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर बैंक एवं संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मामले को कलेक्टर ने टीएल में दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं। हितग्राही के मुताबिक उसने 3 जनवरी 2017 को आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए आवेदन किया था। पशुपालन विभाग द्वारा पात्र पाए जाने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी और वर्ष 2021 में इंडियन बैंक देवसर शाखा ने ₹3,40,688 का ऋण स्वीकृत किया।

मुख्यमंत्री के मंच से मिला था स्वीकृति पत्र
हितग्राही का कहना है कि 12 जनवरी 2022 को सिंगरौली के अटल सामुदायिक भवन में आयोजित रोजगार मेले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं तत्कालीन कलेक्टर राजीव रंजन मीणा की मौजूदगी में उसे ऋण स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया था। इसके बावजूद ऋण राशि के वितरण को लेकर बाद की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।

₹1.13 लाख सब्सिडी आई, फिर वापस कैसे गई?
हितग्राही के अनुसार उसके नाम स्वीकृत ₹1,13,562 की सब्सिडी 10 मार्च 2022 को इंडियन बैंक देवसर को प्राप्त हुई थी। आरोप है कि सब्सिडी मिलने के बावजूद ऋण राशि का वितरण नहीं किया गया। बाद में जनवरी 2025 में सब्सिडी वापस किए जाने की जानकारी सामने आई। हितग्राही ने सवाल उठाया है कि जब ऋण स्वीकृत था और सब्सिडी भी बैंक को मिल चुकी थी तो ऋण वितरण क्यों नहीं हुआ? सब्सिडी की राशि इतने समय तक लंबित रहने और बाद में वापस किए जाने के पीछे बैंकिंग प्रक्रिया क्या थी, यह अब जांच का विषय है।

2019 में आवेदन निरस्त, फिर ऋण स्वीकृति कैसे?
हितग्राही ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के जवाबों का हवाला देते हुए रिकॉर्ड में विरोधाभास का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि एक जवाब में वर्ष 2019 में आवेदन निरस्त किए जाने की बात कही गई, जबकि बाद में प्रकरण आगे बढ़ा और वर्ष 2021 में ऋण स्वीकृति पत्र जारी हुआ। शिकायत में बैंक की ओर से सिविल खराब होने के कारण ऋण देने में असमर्थता जताए जाने का भी उल्लेख है। हितग्राही का सवाल है कि यदि सिविल संबंधी समस्या थी तो ऋण स्वीकृति और सब्सिडी प्राप्त होने की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ी?

24 शिकायतों के निस्तारण पर सवाल
हितग्राही ने वर्ष 2018 से 2026 तक दर्ज 24 शिकायतों के निस्तारण पर भी सवाल उठाया है। आरोप है कि कई शिकायतों को वास्तविक समाधान के बिना पोर्टल पर बंद कर दिया गया। वहीं दिसंबर 2025 की एक शिकायत में पशुपालन विभाग की ओर से प्रकरण को इंडियन बैंक देवसर में वितरण के लिए लंबित बताया गया था।

अब जांच से खुलेगा पूरा मामला
हितग्राही ने बैंक और संबंधित विभागों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही उसके अनुसार इंडियन बैंक देवसर शाखा प्रबंधन, आंचलिक स्तर और कॉर्पोरेट कार्यालय को अधिवक्ता के माध्यम से 15 दिन का वैधानिक लीगल नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है। कलेक्टर द्वारा मामले को टीएल में दर्ज कर जांच के निर्देश दिए जाने के बाद अब जांच रिपोर्ट पर नजर है। जांच में ऋण स्वीकृति, सब्सिडी की प्राप्ति और वापसी, बैंक रिकॉर्ड तथा सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निस्तारण से जुड़े तथ्यों की पड़ताल होगी। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में वास्तविक स्थिति क्या है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।

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