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Singrauli News: सिंगरौली। जिले की लोक एवं जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने के लिए मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत जिले सहित प्रदेश के स्थानीय यूट्यूबर, वीडियो कंटेंट क्रिएटर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण से जोड़ा जाएगा। पहल के लिए 1 अक्टूबर 2026 से निःशुल्क पंजीयन शुरू होगा।
इच्छुक कंटेंट क्रिएटर मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय की वेबसाइट www.mptribalmuseum.com पर जाकर पंजीयन करा सकेंगे। पहल का उद्देश्य केवल सोशल मीडिया पर संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना नहीं, बल्कि लोकगीत, लोकनृत्य, लोककला, लोककथाओं, पर्व-त्योहारों, पारंपरिक जीवनशैली और जनजातीय परंपराओं का प्रामाणिक दृश्य-श्रव्य दस्तावेज तैयार करना है।
स्थानीय परंपराओं को मिलेगा डिजिटल मंच
संग्रहालय के संग्रहाध्यक्ष अशोक मिश्र के अनुसार स्थानीय कंटेंट क्रिएटर अपने क्षेत्र के लोक कलाकारों, परंपरा-वाहकों और समुदायों तक पहुंचकर वहां की सांस्कृतिक गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकेंगे। इससे ऐसी लोक परंपराओं और कलाकारों को भी डिजिटल मंच मिल सकेगा, जो अब तक बड़े प्लेटफॉर्म तक नहीं पहुंच पाए हैं।
पहल के तहत विलुप्तप्राय और महत्वपूर्ण लोक एवं जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ विभिन्न अंचलों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने पर जोर दिया जाएगा। स्थानीय भाषा, बोली और सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश से परिचित कंटेंट क्रिएटर इस काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डिजिटल अभिलेख के रूप में सुरक्षित होगी विरासत
इस पहल के माध्यम से क्षेत्रीय और प्रामाणिक सांस्कृतिक सामग्री का संकलन एवं अभिलेखीकरण भी किया जाएगा। इससे सोशल मीडिया पर लोक संस्कृति को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय ने जिले के स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स से इस पहल से जुड़ने की अपील की है, ताकि वे अपने क्षेत्र के लोक कलाकारों, परंपराओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने के साथ व्यापक स्तर पर प्रस्तुत कर सकें।