Sidhi News: कन्या महाविद्यालय के छात्रा ग्रुप में भेजे गए अश्लील वीडियो, स्पोर्ट्स टीचर ने बताया मोब
Singrauli News: फर्जी ऑनलाइन हाजिरी का मामला: दो अतिथि शिक्षकों को किया ब्लैकलिस्ट
Singrauli News: 500 मीटर में तीन सामुदायिक भवन! कहीं निर्माण पर मेहरबानी तो कहीं बुनियादी सुविधा का
Singrauli News: पटाखा कारोबारियों के लिए जीएसटी पंजीयन अनिवार्य, अस्थायी लाइसेंसधारियों की मांगी सूच
Singrauli News: सिंगरौली पुलिस विभाग में 77 कर्मचारियों के तबादले, एसआई से आरक्षकों तक बदली गई पदस्थ
Singrauli News: आधुनिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने की पहल, 13 गांवों के 500 से अधिक किसान लाभान्वित
Singrauli News: भाजपा जिलाध्यक्ष सुंदरलाल शाह ने किया ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण, मरीजों से जाना स्वास
Singrauli News: वेतन के इंतजार में जलापूर्ति कर्मचारी, कई वार्डों में पानी की सप्लाई प्रभावित
Singrauli News: सेकंड लायंस क्लब ओपन शतरंज प्रतियोगिता का समापन, 122 खिलाड़ियों ने दिखाया दम
Singrauli News: थाना प्रभारी की हत्या के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन, मानव श्रृंखला बनाकर दी श्रद
Singrauli News: Three community buildings within 500 meters! While some projects receive generous support, others are still left waiting for basic amenities.
जैतपुर में 80 लाख रुपये से तीसरा भवन बनवाने की तैयारी, एनसीएल के सीएसआर से बने पुराने दो भवन खंडहर में तब्दील
Singrauli News: सिंगरौली। नगर निगम में विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने का तरीका भी गजब है। कहीं एक ही इलाके में महज 200 से 500 मीटर के दायरे में तीन-तीन सामुदायिक भवनों की व्यवस्था खड़ी की जा रही है, तो कहीं हजारों की आबादी आज भी एक सामुदायिक भवन के लिए तरस रही है। मामला नगर निगम के वार्ड क्रमांक 20 जैतपुर का है, जहां पहले से दो सामुदायिक भवन मौजूद हैं। दोनों भवनों की हालत बदहाल बताई जा रही है, लेकिन उनकी मरम्मत और रखरखाव कराने के बजाय लगभग 80 लाख रुपये की लागत से तीसरे भवन का निर्माण कराया जा रहा है। दूसरी ओर, इसी वार्ड के पिपरा लाल क्षेत्र में सामुदायिक भवन की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नगर निगम की विकास योजनाओं में जरूरत को प्राथमिकता दी जा रही है या निर्माण कार्यों को?
सीएसआर से बने भवनों की दुर्दशा, जिम्मेदारों ने नहीं ली सुध
जैतपुर में करीब 20 वर्ष पहले एनसीएल की ओर से सीएसआर मद से सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को शादी-विवाह, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए सुविधा उपलब्ध कराना था। निर्माण के बाद भवन नगर निगम को सौंप दिया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि निगम ने इसके रखरखाव और मरम्मत को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। नतीजा यह है कि भवन की खिड़कियां गायब हैं, बाउंड्री क्षतिग्रस्त है और दीवारों से ईंटें तक उखड़ने की स्थिति सामने आ रही है।
इसी तरह एनसीएल दुधीचुआ की ओर से करीब 10 से 15 वर्ष पहले बनाए गए दूसरे सामुदायिक भवन की स्थिति भी बेहतर नहीं बताई जा रही है। यहां दरवाजे, खिड़कियां, शौचालय और नल-पाइप जैसी जरूरी सुविधाएं क्षतिग्रस्त होने अथवा गायब होने की शिकायतें हैं। दोनों भवनों की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि सरकारी और सीएसआर की राशि से बनी परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
पुराने भवन संभले नहीं, तीसरे पर 80 लाख खर्च करने की तैयारी
सबसे बड़ा सवाल तीसरे सामुदायिक भवन के निर्माण को लेकर है। जब जैतपुर में पहले से दो भवन मौजूद हैं और दोनों की हालत खराब है, तो उसी क्षेत्र में तीसरे भवन की जरूरत किस सर्वे और किस मांग के आधार पर तय की गई? क्या नगर निगम ने पहले पुराने भवनों की मरम्मत और उपयोगिता का आकलन किया? क्या निर्माण की स्वीकृति देने से पहले आसपास की आबादी और वास्तविक आवश्यकता का परीक्षण हुआ? यदि पुराने भवनों को दुरुस्त कर उपयोग के योग्य बनाया जा सकता था, तो 80 लाख रुपये के नए निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी? यह केवल एक भवन के निर्माण का मामला नहीं, बल्कि नगर निगम की योजना बनाने और सार्वजनिक धन के उपयोग की प्राथमिकताओं से जुड़ा सवाल है।
पिपरा लाल की अनदेखी क्यों?
वार्ड क्रमांक 20 के पिपरा लाल क्षेत्र की स्थिति इस पूरे मामले को और गंभीर बनाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हजारों की आबादी वाले इस क्षेत्र में आज तक सामुदायिक भवन की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों के लिए लोगों को दूसरी जगहों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में एक ही वार्ड के जैतपुर में कम दूरी पर तीन भवनों की व्यवस्था और पिपरा लाल में एक भी भवन नहीं होना विकास कार्यों के क्षेत्रीय संतुलन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
नगर निगम बताए, जरूरत किसकी और प्राथमिकता किसे?
स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर निगम प्रशासन पहले दोनों पुराने भवनों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराए। उनकी मरम्मत, सुरक्षा और उपयोगिता सुनिश्चित की जाए। साथ ही 80 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन भवन की स्वीकृति, आवश्यकता और खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाए। पिपरा लाल में सामुदायिक भवन की जरूरत को भी विकास योजना में शामिल किया जाए।