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जिला प्रशासन ने 25 हजार और डॉ. गंगा वैश्य ने अंतिम संस्कार के लिए दिए 50 हजार रुपये
Singrauli News: सिंगरौली। तमिलनाडु के इरोड में उपचार के दौरान दम तोड़ने वाले बरहपान गांव निवासी 20 वर्षीय राकेश कुमार बैगा का पार्थिव शरीर चार दिन बाद सोमवार शाम करीब सात बजे एंबुलेंस से गांव पहुंचा। जवान बेटे का शव घर पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। पहले से ही गम में डूबे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण तमिलनाडु से शव गांव लाना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसे में मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और समाजसेवियों ने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई।
जानकारी के अनुसार, राकेश शासकीय डिग्री कॉलेज, बैढ़न में अध्ययनरत था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह पढ़ाई जारी रखने और घर के खर्च में सहयोग करने के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले में एक धागा फैक्ट्री में मजदूरी करने गया था। इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
प्रशासन ने दिए 25 हजार, डॉ. गंगा वैश्य ने की 50 हजार की मदद
राकेश की मौत के बाद परिवार के सामने उसका पार्थिव शरीर तमिलनाडु से सिंगरौली लाने की चुनौती थी। परिजनों की आर्थिक परेशानी को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर संघ प्रिया की स्वीकृति से इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के माध्यम से मृतक के पिता प्रेमलाल बैगा को भारतीय स्टेट बैंक के चेक से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। वहीं, समाजसेवी डॉ. गंगा वैश्य ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर अंतिम संस्कार के लिए 50 हजार रुपये की मदद प्रदान की। इसके अलावा अन्य समाजसेवियों ने भी परिवार की सहायता के लिए हाथ बढ़ाया।
आर्थिक तंगी के बीच मिली राहत
जवान बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ओर बेटे को खोने का गम था, तो दूसरी ओर आर्थिक तंगी के कारण उसके पार्थिव शरीर को घर लाने की चिंता सता रही थी। ऐसे कठिन समय में प्रशासन और समाजसेवियों की मदद से शव गांव पहुंच सका। आर्थिक सहायता से परिजनों को अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने में राहत मिली है।