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Singrauli News: बैगा विकास प्राधिकरण और बटालियन का इंतजार, घोषणाओं पर अमल कब?

Rama Posted on: 2026-10-27 16:38:00 Viewer: 52 Comments: 0 Country: India City: Singrauli

Singrauli News: बैगा विकास प्राधिकरण और बटालियन का इंतजार, घोषणाओं पर अमल कब? Singrauli News: Awaiting the Baiga Development Authority and the battalion—when will the announcements be implemented?

सीधी-सिंगरौली के बैगाओं को प्राधिकरण में शामिल करने की मांग, 28 अक्टूबर को प्रदर्शन की तैयारी

Singrauli News: सिंगरौली। मध्यप्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के विकास के लिए घोषित योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बैगा विकास प्राधिकरण के गठन और विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं के लिए प्रस्तावित बटालियन का इंतजार अब भी जारी होने का दावा किया जा रहा है। बैगा समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि घोषणाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। वहीं, सीधी और सिंगरौली के बैगा समुदाय को विकास प्राधिकरण में शामिल करने की मांग भी तेज हो गई है।

बैगा समाज से जुड़े सिंगरौली निवासी विजय बहादुर का कहना है कि अलग विकास प्राधिकरण बनने से समुदाय के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। उनका आरोप है कि प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया लंबित होने से समाज को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, संबंधित फाइल की मौजूदा स्थिति और गठन में देरी के आधिकारिक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

वर्षों से घोषणाएं, लेकिन गठन पर सवाल
बैगा विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव वर्षों पुराना बताया जा रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में इस दिशा में पहल हुई थी। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान भी प्राधिकरण के विस्तार और सीधी-सिंगरौली के बैगा समुदाय को इससे जोड़ने की घोषणा किए जाने का दावा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में भी इसके गठन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।

समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार घोषणाओं के बावजूद प्राधिकरण का गठन नहीं हो पाना चिंताजनक है। उनका सवाल है कि यदि समुदाय के विकास के लिए योजना बनाई गई है, तो उसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है? हालांकि, इन घोषणाओं, स्वीकृतियों और फाइल की वर्तमान स्थिति का आधिकारिक दस्तावेजों से सत्यापन जरूरी है।

सीधी-सिंगरौली के करीब एक लाख बैगाओं को शामिल करने की मांग
बैगा समाज संघ मध्यप्रदेश का दावा है कि सीधी और सिंगरौली जिलों में करीब एक लाख बैगा समुदाय के लोग निवास करते हैं। संगठन की मांग है कि इन दोनों जिलों को भी बैगा विकास प्राधिकरण के दायरे में शामिल किया जाए, ताकि यहां रहने वाले परिवारों को भी विकास योजनाओं का लाभ मिल सके। वर्तमान में प्राधिकरण के लिए जिन जिलों का उल्लेख किया जाता है, उनमें मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया शामिल हैं। सीधी और सिंगरौली के बैगा समुदाय का कहना है कि उन्हें भी समान अवसर और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

समाज के प्रतिनिधियों के मुताबिक, प्राधिकरण के दायरे में आने से रोजगार, आजीविका और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। मछली पालन और बकरी पालन जैसे स्वरोजगार के लिए सहायता तथा ऋण सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है। हालांकि, सरकारी नौकरी में सीधी भर्ती जैसे लाभों की पात्रता और नियमों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

28 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन की तैयारी
बैगा समाज संघ ने सीधी और सिंगरौली के बैगा समुदाय को प्राधिकरण में शामिल करने की मांग को लेकर 28 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट के सामने धरना-प्रदर्शन की तैयारी की है। संगठन का उद्देश्य शासन-प्रशासन का ध्यान लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना और प्राधिकरण के गठन तथा विस्तार पर स्पष्ट निर्णय की मांग करना है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाना भी जरूरी है।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं की बटालियन का प्रस्ताव भी अधर में?
बैगा विकास प्राधिकरण के साथ विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं के लिए प्रस्तावित बटालियन का मुद्दा भी चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बटालियन बनाने की घोषणा किए जाने का उल्लेख सामने आया है। इसके साथ ही शौर्य संकल्प योजना के तहत आदिवासी युवाओं को सेना, नौसेना और वायुसेना में जाने के लिए प्रशिक्षण देने की बात भी कही गई थी।

लेकिन इन पहलों की मौजूदा स्थिति, चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण व्यवस्था और भर्ती संबंधी प्रगति का स्पष्ट आधिकारिक विवरण उपलब्ध होना जरूरी है। समुदाय के युवाओं को यह जानने का इंतजार है कि प्रस्तावित योजनाएं कब तक धरातल पर उतरेंगी और उन्हें रोजगार के वास्तविक अवसर कब मिलेंगे।

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