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"Gyanesh Kumar should resign”: ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें’, एसआईआर के विरोध में दिल्ली में वाम दलों

Rama Posted on: 2026-10-27 13:21:00 Viewer: 79 Comments: 0 Country: India City: New Delhi

"Gyanesh Kumar should resign": Left-wing parties form a human chain in Delhi to protest against the SIR (Social Investigation Report/Social Impact Report).

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने की मांग, भाकपा महासचिव डी. राजा बोले—मुख्य निर्वाचन आयुक्त दें इस्तीफा

"Gyanesh Kumar should resign”: नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को नई दिल्ली में मानव शृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग उठाई। वाम दलों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ियों की आशंका है और इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

यह प्रदर्शन एसआईआर के विरोध में पहले से जारी आंदोलन के तहत आयोजित किया गया। भाकपा सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक नवंबर को बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि विरोध मार्च और अन्य कार्यक्रम भी जारी रहेंगे।

डी. राजा ने की मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग
भाकपा महासचिव डी. राजा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर को फिर से उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए और लोगों को अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर पर जगह मिलनी चाहिए।

भाकपा नेता एनी राजा ने भी एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में इस प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए और सरकार को इसे वापस लेने की दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई।

निर्वाचन आयोग के फैसले पर उठाए सवाल
प्रदर्शन से पहले सांसद पी. संदोष कुमार ने एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग के उस रुख पर सवाल उठाए, जिसमें आयोग ने इस निर्णय को सर्वसम्मति से लिया गया फैसला बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वसम्मति से फैसला लिए जाने का दावा प्रक्रिया की वैधता पर उठ रहे सवालों का जवाब नहीं है।

निर्वाचन आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमार ने कहा कि तीनों निर्वाचन आयुक्तों के बीच सहमति होने मात्र से आयोग अपने फैसले की जवाबदेही से बच नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर का निर्णय जरूरी नहीं था और यह मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी सवाल
पी. संदोष कुमार ने सवाल उठाया कि एसआईआर की आवश्यकता क्यों पड़ी और फॉर्म-6 में बदलाव करने का निर्देश किसने दिया। उन्होंने निर्वाचन आयोग से निर्णय लेने की प्रक्रिया और उससे संबंधित कार्यवाही का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि फैसला सर्वसम्मति से लिया गया हो या बहुमत से, इससे उसकी वैधता का सवाल खत्म नहीं हो जाता। उनके मुताबिक, आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और संबंधित नियमों का पालन किस तरह किया गया।

वाम दलों ने एसआईआर को लेकर अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग के फैसले और प्रक्रिया की वैधता को लेकर नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप उनके दावे हैं; इन पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

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