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91 प्रतिशत से अधिक बैंक खातों का सत्यापन पूरा, फिर भी बजट के इंतजार में भुगतान; पुरानी और छोटी ड्रेस पहनकर स्कूल पहुंच रहे विद्यार्थी
Singrauli News: सिंगरौली। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच सिंगरौली जिले में यूनिफॉर्म की राशि का इंतजार लंबा होता जा रहा है। कक्षा पहली से आठवीं तक के करीब 1 लाख 47 हजार विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अब तक गणवेश की राशि नहीं मिली है। फरवरी से परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं, लेकिन कई बच्चे पुरानी या छोटी हो चुकी ड्रेस पहनकर स्कूल जा रहे हैं। कुछ विद्यार्थी सामान्य कपड़ों में कक्षाओं तक पहुंच रहे हैं। सवाल है कि जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के महीनों बाद भी बच्चों को यूनिफॉर्म के लिए राशि नहीं मिली, तो व्यवस्था में देरी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यूनिफॉर्म के लिए जुलाई में ही स्कूलों से विद्यार्थियों के साइज मंगवाए गए थे। शिक्षकों ने सूची तैयार कर विभाग को सौंप दी थी। इसके बाद शासन ने तैयार गणवेश देने के बजाय अभिभावकों के बैंक खातों में सीधे राशि भेजने का निर्णय लिया। भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से होना है। प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बैंक खातों के सत्यापन का काम भी काफी हद तक पूरा हो चुका है, लेकिन बजट जारी नहीं होने से भुगतान अटका हुआ है।
सत्यापन पूरा होने के बाद भी राशि का इंतजार
विभागीय जानकारी के अनुसार, 91 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों का सत्यापन पूरा हो चुका है। इसके बावजूद जिले के विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म की राशि नहीं मिली है। इससे स्पष्ट है कि समस्या केवल खातों के सत्यापन तक सीमित नहीं है। बजट कब जारी होगा और भुगतान किस समय तक पूरा किया जाएगा, इसका स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि यूनिफॉर्म जैसी बुनियादी जरूरत के लिए राशि समय पर नहीं पहुंचती, तो योजना का लाभ विद्यार्थियों तक देरी से पहुंचता है। सत्र का बड़ा हिस्सा बीत जाने और परीक्षाएं नजदीक आने के बाद भुगतान की प्रतीक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
अभिभावक असमंजस में, बच्चे पुरानी ड्रेस में
यूनिफॉर्म की राशि सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की जानकारी सभी अभिभावकों तक नहीं पहुंचने की बात भी सामने आई है। कुछ अभिभावक अब भी स्कूल से तैयार ड्रेस मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों के लिए नई यूनिफॉर्म की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अपने खर्च पर ड्रेस बनवाना भी अतिरिक्त बोझ बन सकता है।ऐसे में केवल भुगतान प्रक्रिया पूरी करने की बात पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को यह भी स्पष्ट बताया जाना चाहिए कि राशि किस माध्यम से मिलेगी और इसके लिए उन्हें क्या करना होगा। साथ ही, जिन खातों में कोई तकनीकी समस्या है, उनका समय पर निराकरण किया जाना चाहिए।
डीपीसी को जल्द भुगतान की उम्मीद
जिला परियोजना समन्वयक राम लखन शुक्ला ने शनिवार को बताया कि इस शैक्षणिक सत्र में बच्चों को अब तक यूनिफॉर्म नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि शासन की व्यवस्था के अनुसार राशि सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी, ताकि वे बच्चों के लिए अच्छी गुणवत्ता की ड्रेस बनवा सकें। उनके अनुसार, राशि जल्द खातों में पहुंचने की उम्मीद है, हालांकि भुगतान की निश्चित तारीख नहीं बताई गई।