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Singrauli News: Sarai village coal siding gets operational approval amidst villagers' protest.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 31 अगस्त 2031 तक दी सहमति, सालाना 4.80 लाख मीट्रिक टन कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन की अनुमति
Singrauli News: सिंगरौली। सरई ग्राम में प्रस्तावित रेलवे कोयला साइडिंग के संचालन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के लगातार विरोध के बीच मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मेसर्स सरई ग्राम गुड्स शेड को संचालन की सहमति दे दी है। भोपाल स्थित बोर्ड मुख्यालय से जारी आदेश के अनुसार साइडिंग के जरिए प्रतिवर्ष 4.80 लाख मीट्रिक टन कोयले की लोडिंग, अनलोडिंग और परिवहन किया जा सकेगा। यह सहमति 31 अगस्त 2031 तक प्रभावी रहेगी। साइडिंग को लेकर ग्रामीण लंबे समय से कोयला परिवहन से उड़ने वाली धूल, भारी वाहनों की आवाजाही और पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर आपत्ति जताते रहे हैं। इसके बावजूद बोर्ड ने पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़ी कई शर्तों के साथ संचालन की अनुमति जारी की है।
चार मिस्ट फॉगर और स्थायी रेन गन अनिवार्य
बोर्ड के आदेश में धूल नियंत्रण के लिए साइडिंग परिसर में कम से कम चार मिस्ट फॉगर मशीनें लगाने के साथ स्थायी रेन गन की व्यवस्था करने की शर्त रखी गई है। इसके अलावा सड़क किनारे घना पौधरोपण और करीब तीन किलोमीटर लंबी आरसीसी सड़क बनाए जाने का भी प्रावधान किया गया है। कोयले की लोडिंग और अनलोडिंग वाले क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के लिए निर्धारित पर्यावरण प्रबंधन व्यवस्था लागू करने तथा पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से प्रस्तुत कार्ययोजना के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अनुमति के बाद ग्रामीणों की आपत्तियां फिर अहम
साइडिंग को संचालन की मंजूरी मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इसके जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय शर्तों के पालन को लेकर है। सालाना 4.80 लाख मीट्रिक टन कोयले के संचालन के दौरान धूल और परिवहन से जुड़े प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए तय व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी रहती हैं, इसकी नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीणों की आपत्तियों के बीच अनुमति दिए जाने के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि स्थानीय स्तर पर सामने आई पर्यावरण संबंधी चिंताओं का किस स्तर तक परीक्षण किया गया और साइडिंग संचालन के संभावित प्रभावों को लेकर क्या आकलन किया गया।
कागज पर शर्तें या जमीन पर अमल, यही होगी असली कसौटी
बोर्ड ने मिस्ट फॉगर, रेन गन, पौधरोपण और आरसीसी सड़क सहित कई व्यवस्थाओं को अनिवार्य किया है। अब इन शर्तों का वास्तविक पालन ही साइडिंग के संचालन की पर्यावरणीय स्थिति को तय करेगा। खास तौर पर कोयला लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान धूल नियंत्रण, सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही और आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण की नियमित निगरानी पर नजर रहेगी।