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जांच नहीं होने से हाईरिस्क गर्भवती को 5 घंटे करना पड़ा इंतजार
रात में जांच उपलब्ध नहीं होने पर करीब ₹1500 खर्च कर बाहर से कराई जांच; तीन महीने पहले पहुंची नई मशीनें अब तक टेक्नीशियन के इंतजार में
Singrauli News: सिंगरौली। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में जरूरी जांचों की उपलब्धता को लेकर अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मंगलवार देर रात एक हाईरिस्क गर्भवती को प्रसव से पहले आवश्यक जांच नहीं हो पाने के कारण करीब पांच घंटे इंतजार करना पड़ा। अस्पताल की लैब में जांच उपलब्ध नहीं होने पर परिजनों को बाहर से जांच करानी पड़ी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सुबह करीब 5 बजे महिला का प्रसव कराया गया। महिला की डिलीवरी सुरक्षित होने की जानकारी है। मामला सामने आने के बाद अस्पताल की लैब में जांच व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ जरूरी जांचें रसायन की कमी और पुरानी मशीनों में खराबी के कारण प्रभावित हैं। वहीं करीब तीन महीने पहले अस्पताल पहुंची नई मशीनें भी टेक्नीशियन के अभाव में अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं।
हाईरिस्क गर्भवती को रात में बाहर से करानी पड़ी जांच
जानकारी के अनुसार तियरा निवासी रेखा बसोर को मंगलवार रात करीब 12 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह हाईरिस्क गर्भवती बताई गईं। प्रसव से पहले डॉक्टरों ने खून से संबंधित कुछ जरूरी जांच कराने को कहा। सिजेरियन से पहले खून के जमने की क्षमता की जांच भी आवश्यक थी, लेकिन अस्पताल की लैब में यह जांच उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद परिजनों को करीब 1500 रुपये खर्च कर बाहर से जांच करानी पड़ी। रिपोर्ट मिलने के बाद सुबह करीब 5 बजे महिला की डिलीवरी कराई गई।
रसायन की कमी से कई जांच प्रभावित
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार खून के जमने की क्षमता से संबंधित जांच करीब 15 दिन पहले भी प्रभावित हुई थी। वर्तमान में संबंधित जांच में इस्तेमाल होने वाला रसायन पिछले करीब पांच दिनों से उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। इसके अलावा हार्मोन से संबंधित जांच और खून की कुछ अन्य जांचें भी प्रभावित होने की जानकारी है। रात के समय मशीन में खराबी आने पर संबंधित कंपनी के टेक्नीशियन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाने की बात भी सामने आई है।
तीन महीने पहले आई नई मशीन, अब तक शुरू नहीं
जिला अस्पताल की एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य लैब में नई मशीनें आए करीब तीन महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद इन मशीनों के संचालन के लिए टेक्नीशियन अब तक नहीं पहुंच सके हैं। नतीजा यह है कि नई मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को जांच सुविधा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. कल्पना रवि ने बताया कि नई मशीनें अस्पताल में आ चुकी हैं। इन्हें संचालित करने वाले टेक्नीशियन के आने के बाद जांच शुरू हो सकेगी। उन्होंने बताया कि पुरानी मशीनों में इस्तेमाल होने वाले रसायन की कमी के कारण भी जांच प्रभावित हो रही हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग भोपाल को पत्र भेजकर संबंधित कंपनी की शिकायत की गई है।
मरीजों को बाहर जांच कराने की मजबूरी
लैब में जांच प्रभावित होने का असर मरीजों पर पड़ रहा है। जरूरी जांच अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। खासकर रात के समय गंभीर या हाईरिस्क मरीजों के लिए यह स्थिति परेशानी बढ़ाने वाली है। हाईरिस्क गर्भवती के मामले में पांच घंटे बाद डिलीवरी हो सकी। हालांकि महिला की डिलीवरी सुरक्षित होने की जानकारी है, लेकिन घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जब जिला अस्पताल में नई मशीनें तीन महीने से मौजूद हैं, तो उन्हें अब तक चालू क्यों नहीं किया गया और जरूरी जांचों के लिए रसायन की उपलब्धता सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही है?