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Singrauli News: Questions raised over THDC’s coal mines; allegations of discharging coal-laden water into the Kachan River.
पांच साल से संचालित खदान की जल निकासी व्यवस्था जांच के दायरे में, 50 मवेशियों की मौत का दावा
Singrauli News: सिंगरौली। जिले में टीएचडीसी की कोल माइंस से कथित रूप से कोयलायुक्त पानी काचन नदी में पहुंचने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत पिड़रवाह के सरपंच ने कंपनी की खदान से निकलने वाले पानी की निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से जांच की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान तक कोयला परिवहन के दौरान भी नदी के आसपास कोयला जमा हो रहा है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगने की बात कही है।
ग्रामीणों के अनुसार, टीएचडीसी की कोल माइंस करीब पांच वर्षों से संचालित है। आरोप है कि खदान से निकलने वाला पानी काचन नदी तक पहुंच रहा है। यदि पानी का उचित उपचार किए बिना उसे नदी में छोड़ा जा रहा है, तो यह पर्यावरणीय मानकों के पालन से जुड़ा मामला है। हालांकि, नदी में प्रदूषण की स्थिति और उसके स्रोत की पुष्टि अभी आधिकारिक जांच से होना बाकी है।
टीएचडीसी की जल निकासी व्यवस्था पर उठे सवाल
सरपंच के अनुसार, कंपनी के कन्वेयर बेल्ट के शुरुआती हिस्से से करीब 500 मीटर पश्चिम दिशा में स्थित खदान से निकलने वाले पानी को काचन नदी में छोड़े जाने की आशंका है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि खदान से निकलने वाले पानी का उपचार किस तरह किया जाता है और उसे नदी तक पहुंचने से रोकने के लिए क्या व्यवस्था है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान का संचालन कई वर्षों से हो रहा है, ऐसे में जल निकासी व्यवस्था और नदी की जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी जरूरी है। अब यह जांच का विषय है कि कंपनी निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रही है या नहीं।
अस्थायी पुल से कोयला परिवहन, नदी किनारे जमाव का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक, खदान तक पहुंचने के लिए काचन नदी पर अस्थायी पुल बनाया गया है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब एक हजार कोयला वाहनों की आवाजाही होने का दावा किया गया है। आरोप है कि परिवहन के दौरान वाहनों से कोयला गिरता है, जिससे पुल के आसपास और नदी किनारे कोयला जमा हो रहा है। यदि यह स्थिति जांच में सही पाई जाती है, तो कंपनी की परिवहन व्यवस्था और प्रदूषण रोकने के उपायों की समीक्षा आवश्यक होगी। नदी के पानी पर इसके प्रभाव का पता लगाने के लिए नमूनों की प्रयोगशाला जांच भी जरूरी है।
50 मवेशियों की मौत का दावा, जांच की मांग
पिड़रवाह के सरपंच ने दावा किया है कि पिछले वर्ष कथित दूषित पानी पीने से करीब 50 मवेशियों की मौत हुई थी। उन्होंने आसपास के दो से तीन गांवों के लोगों के नदी पर निर्भर होने और ग्रामीणों के बीमार पड़ने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही है। हालांकि, मवेशियों की मौत या ग्रामीणों की बीमारी का संबंध नदी के पानी से होने की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए पशु चिकित्सा अभिलेखों, स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों और जल नमूनों की जांच आवश्यक होगी।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कार्रवाई पर नजर
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी रतिपाल ठाकुर ने कहा, “अभी मामला संज्ञान में नहीं आया था। टीएचडीसी कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।” अब कंपनी के जवाब और विभागीय जांच से स्पष्ट होगा कि खदान से निकलने वाले पानी का निस्तारण किस तरह किया जा रहा है और नदी की जल गुणवत्ता पर उसका कोई प्रभाव पड़ रहा है या नहीं। ग्रामीणों ने मांग की है कि खदान की जल निकासी व्यवस्था, अस्थायी पुल के आसपास कोयले के जमाव और नदी के पानी की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। यदि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।
काचन नदी आसपास के गांवों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। ऐसे में टीएचडीसी की खदान से जुड़े इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक करना जरूरी है। खबर लिखे जाने तक कंपनी का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं था।