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नोटिस और हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं, जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे के पास भेजते रहे मामला
Singrauli News: सिंगरौली। बैढ़न शहर में भवन अनुज्ञा के नियमों और शर्तों के उल्लंघन को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जी-2 माल (गंगोत्री-2 माल) और जीएस प्लाजा के कथित अवैध निर्माण को लेकर निगम की ओर से नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आने के बावजूद कार्रवाई आगे बढ़ती दिखाई नहीं दे रही है। वहीं, मामले की वर्तमान स्थिति जानने के लिए जब निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया गया तो कोई अधिकारी स्पष्ट जवाब देने के बजाय मामले को दूसरे अधिकारी के पास भेजता नजर आया।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन अनुज्ञा के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी हो चुका है और जी-2 माल से जुड़े मामले में हाईकोर्ट भी नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दे चुका है, तो नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई?
आयुक्त से लेकर भवन अधिकारी तक, जवाब के बजाय दूसरे अधिकारी का नाम
मामले की जानकारी लेने के लिए नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान से संपर्क किया गया। उन्होंने मामले की जानकारी के लिए उपायुक्त आरपी वैश्य से बात करने को कहा।
इसके बाद उपायुक्त से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए भवन अधिकारी दिनेश तिवारी से जानकारी लेने की बात कही। भवन अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने कार्यक्रम में व्यस्त होने का हवाला देते हुए बाद में बात करने की बात कही।
अधिकारियों के इस रवैये ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मामला भवन अनुज्ञा के उल्लंघन और कथित अवैध निर्माण से जुड़ा है, तो संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास इसकी स्पष्ट जानकारी और कार्रवाई की स्थिति क्यों नहीं है? क्या निगम में किसी मामले की जिम्मेदारी तय है या कार्रवाई की फाइल एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी तक ही घूमती रहती है?
जी-2 माल पर पहले नोटिस, फिर हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
बताया जाता है कि बैढ़न-विंध्यनगर मुख्य मार्ग पर ढोटी स्थित जी-2 माल के संचालक को नगर निगम के भवन विभाग की ओर से भवन अनुज्ञा के विपरीत किए गए कथित निर्माण को हटाने का नोटिस जारी किया गया था। नगर निगम द्वारा भवन की पैमाइश कराए जाने के बाद स्वीकृत भवन अनुज्ञा से अधिक निर्माण पाए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। निगम के नोटिस के खिलाफ भवन संचालक हाईकोर्ट पहुंचा था। मिली जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में न्यायालय के निर्देश के बाद निगम की कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक होना जरूरी है। लेकिन वर्तमान स्थिति को लेकर अधिकारी स्पष्ट जानकारी देने से बचते नजर आ रहे हैं।
जीएस प्लाजा को भी नोटिस, लेकिन आगे क्या हुआ?
इसी तरह कोतवाली रोड-बस स्टैंड मार्ग स्थित जीएस प्लाजा के निर्माण को लेकर भी भवन अनुज्ञा के विपरीत निर्माण किए जाने की शिकायत सामने आई है। जानकारी के अनुसार नगर निगम की ओर से संचालक को कथित अवैध निर्माण के संबंध में नोटिस जारी किया गया है। लेकिन यहां भी सवाल यही है कि नोटिस जारी होने के बाद निगम ने क्या कार्रवाई की? क्या निर्माण की दोबारा पैमाइश हुई? क्या स्वीकृत नक्शे और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया गया? यदि उल्लंघन की पुष्टि हुई तो क्या अवैध हिस्से को हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल नगर निगम की ओर से सामने नहीं आया है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस से नहीं चलेगा काम
शहर में भवन अनुज्ञा के नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। यदि किसी व्यावसायिक भवन में स्वीकृत अनुमति से अधिक निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। लेकिन नोटिस जारी करने के बाद कार्रवाई का ठिकाना स्पष्ट न होना निगम की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। खास बात यह है कि एक ओर शहर में छोटे निर्माणों पर नियमों का हवाला देकर कार्रवाई की जाती है, वहीं बड़े व्यावसायिक भवनों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदारी तय होगी या फाइलों में ही दबे रहेंगे मामले?
जी-2 माल और जीएस प्लाजा के मामले में अब निगाहें नगर निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ बुलडोजर चलने या न चलने का नहीं, बल्कि नियमों के उल्लंघन की जांच, जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की पारदर्शी प्रक्रिया का है। यदि निगम के रिकॉर्ड में निर्माण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कार्रवाई कब होगी? और यदि उल्लंघन नहीं है तो निगम द्वारा जारी नोटिस की स्थिति क्या है? नगर निगम को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
फिलहाल स्थिति यह है कि नोटिस मौजूद है, न्यायालय का निर्देश सामने है, लेकिन कार्रवाई की स्थिति बताने वाला जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आ रहा। यही रवैया नगर निगम की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।