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कोयला खदानों में अवैध कमाई की राजनीति !
Singrauli News: सिंगरौली। एनसीएल की कोयला परियोजना गोर्बी ब्लॉक-बी क्षेत्र से जुड़ी अजंता–राधा (कलिंगा) कंपनी का एक कथित वायरल ऑडियो सिंगरौली में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऑडियो में कथित तौर पर कंपनी के एक पूर्व उच्च अधिकारी की आवाज़ सुनाई दे रही है, जिसमें भर्ती के नाम पर पैसों की लेन-देन, स्ट्राइक कराने की योजना और कंपनी में व्यक्तिगत लाभ के सौदे जैसे गंभीर बातें सामने आई हैं।
कम्पनी आई तो लगा मौका मिल गया कमाने का
वायरल ऑडियो में कोई कहता है मुझे 19 लाख की किश्त भरनी है, कोई पत्नी के लिए एक किलो सोना खरीदना चाहता है, किसी को लाख-दो लाख महीना अलग चाहिए। ऑडियो में यह भी दावा किया गया है कि अभी 1600 मैनपावर करना है, तब कोई डिफेंडर खरीदेगा, कोई किश्त भरेगा और कोई गहना खरीदेगा। इन बातों ने कंपनी की भर्ती प्रक्रिया और अंदरूनी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूर्व अधिकारी का खुलासा या अंदरूनी रंजिश?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह ऑडियो कथित तौर पर कलिंगा कंपनी के पूर्व अधिकारी द्वारा लीक किया गया बताया जा रहा है। वायरल सामग्री से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि “पूर्व के मिश्रा बन्धु” पुनः नौकरी छोड़कर कलिंगा कंपनी में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। सवाल उठ रहा है — आखिर ऐसी क्या वजह है कि दूसरी नौकरी भी इन्हें रास नहीं आ रही और निजी कंपनी की ओर रुख करने की उत्सुकता इतनी बढ़ गई है?
नौकरी बेचने और ‘स्ट्राइक की साजिश’ के गंभीर आरोप
ऑडियो के खुलासों से लगता है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर श्रमिकों के वेतन या लीव पेमेंट में देरी करवाते हैं ताकि असंतोष बढ़े और हड़ताल (स्ट्राइक) की स्थिति बने। ऐसा कर वे अपने “राजनीतिक तौर पर जुड़े नेताओं” को हर महीने लाख रुपये का लाभ दिलवाने की कोशिश करते हैं। यदि यह सब सही साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल कंपनी बल्कि प्रशासनिक व श्रमिक हितों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है।
कंपनी की चुप्पी, जांच की मांग तेज
अब तक कंपनी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है और एनसीएल प्रबंधन व जिला प्रशासन से जांच की मांग उठने लगी है। श्रमिक संघों का कहना है कि “यदि यह बातें सच हैं तो सिंगरौली की औद्योगिक साख पर गंभीर असर पड़ेगा।”
फिलहाल यह पूरा मामला अभी वायरल ऑडियो पर आधारित है। ऑडियो की प्रामाणिकता की जांच, उसमें शामिल लोगों की पहचान और कंपनी के आधिकारिक पक्ष के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी। हालकि सिंगरौली मिरर इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है परन्तु, जिस तरह यह ऑडियो.. कंपनी तंत्र, भर्ती और अंदरूनी लेन-देन के सवाल उठाता है, उससे एक बात साफ़ है — सिंगरौली की खदानों में ‘कमाई की राजनीति’ अब खुली सच्चाई बनती जा रही है।