NCL Corruption: एनसीएल परियोजनाओं में व्यापक पैमाने पर हो रहा भ्रष्टाचार : बिनोद कुर्वंशी

Admin Posted on: 2023-05-25 16:13:00 Viewer: 372 Comments: 0 Country: India City: Singrauli

NCL Corruption: एनसीएल परियोजनाओं में व्यापक पैमाने पर हो रहा भ्रष्टाचार : बिनोद कुर्वंशी NCL Corruption: Widespread corruption in NCL projects: Binod Kurvanshi

 

Singrauli NCL Corruption: सिंगरौली: युवा समाजसेवी एवं भाजपा कार्यकर्ता विनोद सिंह ने भारत की मिनी रत्न कंपनी एनसीएल परियोजनाओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एनसीएल परियोजनाओं में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिससे शासन प्रशासन को भी लाखों करोड़ों का राजस्व हानि हो रहा है। श्री सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि एनसीएल परियोजनाओं में ओवर वार्डन का कार्य कर रही कंपनियों में लगे वाहनों का कोई भी फिटनेस नहीं है एनसीएल प्रबंधक उन्हें छुपाने के लिए खदानों के अंदर पार्किंग स्थल बना के रखा है जिसके कारण जिला के आरटीओ विभाग का भी उन वाहनों पर नजर नहीं पड़ता है। वाहनों में ना तो कोई नंबर प्लेट होता है नाही उसकी कोई फिटनेस जिसके कारण आए दिन हादसे एनसीएल परियोजनाओं में देखने को मिल रहे हैं वही इन कंपनियों और एनसीएल प्रबंधक की मनमानी रवैया के कारण मजदूरों को अपने जान से हाथ धोना पड़ रहा है। खदानों के अंदर कार्यरत कर रहे कंपनी नियमों को ठेंगा दिखा रही है एक तरफ जहां वाहनों का रजिस्ट्रेशन मैग्नेट होना चाहिए था ऐसे में कंपनी चंद पैसे बचाने की चाह में लगातार सर्वे ऑफ हो चुके मशीनरी से भी काम ले रही।

एनसीएल प्रबंधक आरटीओ विभाग के आंखों में झोंक रहा धूल

विनोद कुर्वंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि एनसीएल खदानों के अंदर ओवी कंपनियों में लगी गाड़ियां के ना तो कोई फिटनेस है और ना ही उन गाड़ियों में कोई नंबर प्लेट कई गाड़ियां तो सर्वे अभी खदानों में चलाई जा रही हैं एनसीएल प्रबंधक की देखरेख में हो रहे इस व्यापक भ्रष्टाचार से लाखों-करोड़ों का राजस्व की चोरी भी की जा रही है। जिसे ना तो परिवहन विभाग पकड़ पा रहा है और ना ही इन गाड़ियों पर कोई कार्रवाई हो पा रही है। आपको पता तो चले कि एंड सेल की कोयला खदान में कार्य कर रही ओवर वर्डन कंपनियां एक तरफ से हर नियमों को ठेंगा दिखा रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ सर्वे ऑफ हो चुके गाड़ियों का खदानों में बेझिझक तरीके से प्रयोग कर जान माल का भी नुकसान कर रहे हैं।

बीते दिनों एनसीएल दूधिचुआ परियोजना में हुए हादसे में एक श्रमिक की मौत हो गई थी जिस पर दूधिचुआ परियोजना के जीएम सतीश झा ने भी यह माना कि एनसीएल परियोजनाओं में कई व्यवस्थाओं की कमी है। और इन कमियों को जल्द ही पूरा किया जाएगा। एक तरफ खदानों में होने वाले हादसों में लोग अपनी जान गवा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ सरकार को भी राजस्व की हानि हो रही है इसके साथ ही जिम्मेदार कंपनी नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड की जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी संबंधित मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

एनसीएल की ओबी कंपनियों में कार्य कर रहे मजदूरों का हो रहा शोषण

युवा समाजसेवी एवं भाजपा कार्यकर्ता विनोद कुर्वंशी ने यह भी बताया कि एनसीएल परियोजनाओं में वह भी कंपनियों में कार्य कर रहे मजदूरों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है। जिसकी जानकारी बकायदा एनसीएल प्रबंधक को भी है परंतु उन वह भी कंपनियों पर एनसीएल प्रबंधक कोई अंकुश नहीं लगा रहे हैं एनसीएल प्रबंधक और ओवी कंपनियों की अधिकारियों की मिलीभगत से मजदूरों का शोषण कई वर्षों से किया जा रहा है। दरसअल खदानों में कार्यरत मजदूरों के वेतन भुगतान को लेकर जारी नियमावली को भी ठेंगा दिखा रही हैं ओवरबर्डन कंपनियां। जिन मजदूरों को उचित वेतन कंपनी की तरफ से मिलना चाहिए कंपनियां उसमें भी सेंधमारी करती नजर आ रही हैं ऐसा भी नहीं है कि इस पूरे मामले की जानकारी जिम्मेदारों को नहीं है दरअसल कई सालों से कार्यरत ओवरबर्डन कंपनियां मजदूरी के नाम पर महज मजदूरों का शोषण कर रही है एनसीएल प्रबंधन के विभाग के अधिकारियों के समक्ष यह जानकारी मौजूद होती है परंतु संबंधित अधिकारी भी इस पूरे मामले पर न तो किसी प्रकार की कोई कार्रवाई और ना ही मजदूरों को हक दिलाने में अपनी भूमिका निभा पाते हैं एनसीएल के विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत ओवरबर्डन कंपनियों की यदि एनसीएल प्रबंधन जांच करें तो इस मामले में काफी बड़े खुलासे हो सकते हैं गौरतलब हो कि ओवरबर्डन कंपनियां एक तरफ जहां मजदूरों का शोषण करती हैं वही हादसा होने के बाद कंपनियां मजदूरों से अपना पल्ला झाड़ने में भी देर नहीं करती हैं । एनसीएल की कोयला खदानों में कार्यरत कंपनियों की मनमानी का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं एक तरफ जहां स्थानीय लोगों को रोजगार देने की बात आती है तो ऐसे में यह कंपनियां जगह ना होने का हवाला देती रहती हैं परंतु संबंधित मामले ऐसे भी कई प्रकरण पुलिस के समक्ष पंजीबद्ध हो चुके हैं जिसमें नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपए की ठगी तक की जा चुकी है कंपनियां अपने साथ अधिकतर जिले के बाहर के मजदूरों को ही लेकर आती हैं या फिर उन्हें प्राथमिकता देती है दरअसल यह मजदूर किसी भी प्रकार से कंपनी प्रबंधन के विरोध में अपने स्वर मजबूत नहीं कर पाते हैं जिसका फायदा कंपनी को होता रहता है और अगर कभी कबार कोई हादसा हो भी गया तब वह कंपनियां इस पूरे मामले को दबाने में सफल भी हो जाती हैं।

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